विस्तृत उत्तर
एकादशी' (एका+दश) ग्यारह (11) का वाचक है, जो मानव शरीर के ग्यारह तत्वों (पाँच ज्ञानेंद्रियाँ, पाँच कर्मेंद्रियाँ और ग्यारहवाँ मन) का प्रतीक है। इसका उद्देश्य इन ग्यारह तत्वों को संसार की बहिर्मुखी प्रवृत्तियों से समेटकर भगवान विष्णु में एकाग्र करना है। 'उपवास' का अर्थ है 'उप' (निकट) + 'वास' (निवास करना), अर्थात् अपनी समस्त इंद्रियों और मन के साथ परमात्मा के सान्निध्य में रहना। एकादशी पर अन्न का त्याग आध्यात्मिक प्रक्रिया है ताकि शरीर की ऊर्जा पाचन में व्यर्थ न होकर भगवान के ध्यान में लगे।




