विस्तृत उत्तर
त्रयोदशी श्राद्ध में कर्ता को स्नान कर श्वेत वस्त्र धारण कर मध्याह्न तक उपवास रखकर कर्म आरम्भ करना चाहिए।
त्रयोदशी श्राद्ध में उपवास क्यों को संदर्भ सहित समझें
त्रयोदशी श्राद्ध में उपवास क्यों का सबसे सीधा सार यह है: शुद्धता और संयम के लिए।
लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.
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इसी विषय के 5 प्रश्न
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व्रत उपवास के वैज्ञानिक लाभ?
Autophagy(Nobel 2016): 12-16hr उपवास=कोशिका सफाई। इंसुलिन/Diabetes सुधार, Fat burning, Brain BDNF, हृदय, Longevity। एकादशी(15 दिन)=5000 वर्ष पहले वही=Nobel 2016। Diabetes/गर्भवती=डॉक्टर।
देवी अनुष्ठान में कितने दिन उपवास रखना चाहिए?
9 दिन (नवरात्रि), 16 (महालक्ष्मी), 21, 40 (तांत्रिक)। उपवास: निराहार/फलाहार/एक समय/सात्विक। सवा लाख जप = 40 दिन। ब्रह्मचर्य अनिवार्य।
रामनवमी पर व्रत कैसे रखें?
रामनवमी व्रत में प्रातः स्नान, सूर्य को अर्घ्य, संकल्प और दोपहर को श्रीराम की विशेष पूजा करें। अन्न का त्याग कर फलाहार करें। रामरक्षास्तोत्र और रामचरितमानस का पाठ करें।
शिव मंत्र जप के दौरान उपवास जरूरी है या नहीं?
नित्य जप: उपवास अनिवार्य नहीं, सात्विक आहार पर्याप्त। विशेष अनुष्ठान (सवा लाख जप): उपवास/एकाहार/फलाहार का विधान। सोमवार व्रत, महाशिवरात्रि पर जप+उपवास विशेष फलदायी। मांस-मदिरा-तामसिक आहार सदा वर्जित। शारीरिक स्थिति अनुसार निर्णय लें।
उपवास के बाद क्या करना चाहिए?
दिन-रात उपवास के बाद सुबह स्नान कर ब्रह्मकूर्च-विधि से बने पंचगव्य का पान, आचमन और शिव के आगे गायत्री जप करना चाहिए।
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