विस्तृत उत्तर
कालसर्प शांति के लिए नाग-चेतना से जुड़ने हेतु तीन नाग गायत्री मंत्रों का प्रयोग किया जाता है:
(अ) वासुकि गायत्री (शिव के नाग हेतु): ॐ सर्पराजाय विद्महे, पद्म हस्ताय धीमहि, तन्नो वासुकि प्रचोदयात्
(ब) अनंत गायत्री (नागराज हेतु): ॐ सर्पराजाय विद्महे, नागराजाय धीमहि, तन्नोऽनन्तः प्रचोदयात्
(स) नवनाग गायत्री (नाग-कुल हेतु): ॐ नवकुलाय विद्महे, विषदंताय धीमहि, तन्नो सर्प प्रचोदयात्
इन तीनों में से किसी एक का 11 माला (11 x 108) जप किया जाता है।





