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भगवान विष्णु शेषनाग पर क्यों लेटते हैं?

संक्षिप्त उत्तर

शेषनाग अनंत आधार के प्रतीक हैं, इसलिए विष्णु उन पर शयन करते हैं।

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विस्तृत उत्तर

शेषनाग का अर्थ ही है वह जो सब कुछ समाप्त हो जाने के बाद भी शेष रहे। महाप्रलय में जब सभी लोक, ग्रह, जीव और दिशाएँ लीन हो जाती हैं, तब अनंत शेष विष्णु की दिव्य शय्या के रूप में वर्णित हैं। इसका भाव यह है कि परिवर्तनशील सृष्टि के पीछे एक ऐसा अनंत आधार है जो कभी नष्ट नहीं होता। भगवान विष्णु का शेषनाग पर शयन यह भी दिखाता है कि परम चेतना अनंतता के आधार पर स्थित होकर नई सृष्टि का संकल्प करती है।

उत्तर को थोड़ा और स्पष्ट करें

भगवान विष्णु शेषनाग पर क्यों लेटते हैं को संदर्भ सहित समझें

भगवान विष्णु शेषनाग पर क्यों लेटते हैं का सबसे सीधा सार यह है: शेषनाग अनंत आधार के प्रतीक हैं, इसलिए विष्णु उन पर शयन करते हैं।

लोक जैसे विषयों में यह देखना जरूरी होता है कि बात किस परिस्थिति में लागू होती है, किन नियमों के साथ मान्य होती है और व्यवहार में इसका सही अर्थ क्या निकलता है.

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उत्तर पढ़ते समय यह देखें कि उसमें नियम, अपवाद और व्यवहारिक संदर्भ साफ हैं या नहीं।

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