विस्तृत उत्तर
इन सातों पातालों के नीचे तीस हजार योजन की दूरी पर भगवान शेषनाग (अनंत) गर्भोदक सागर में विराजमान हैं जो संपूर्ण ब्रह्मांड का भार अपने फनों पर धारण करते हैं। शेषनाग को अनंत देव भी कहा जाता है। पाताल (सातवाँ और अंतिम अधोलोक) के नीचे तीस हजार योजन की विशाल दूरी है और उसके बाद गर्भोदक सागर है जहाँ शेषनाग विराजमान हैं। इस गर्भोदक सागर में ही भगवान विष्णु स्वयं शेषनाग शय्या पर शयन करते हुए सृष्टि का संचालन करते हैं। नरक लोक इन सातों पातालों के नीचे और गर्भोदक सागर के ठीक ऊपर बताया गया है। इस प्रकार पूरी ब्रह्मांडीय संरचना में अतल सबसे ऊपर और शेषनाग सबसे नीचे हैं।
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