विस्तृत उत्तर
हवन करते समय पंडित या अनुष्ठानकर्ता प्रत्येक मंत्र के अंत में 'स्वाहा' शब्द का उच्चारण करके आहुति अग्नि में समर्पित करते हैं।
स्वाहा' का अर्थ है पूर्ण समर्पण और भस्म कर देना। जो भी आहुति दी जाती है, अग्नि देव उसे सूक्ष्म रूप में ग्रहण करके इष्ट देव तक पहुँचाते हैं।
हवन का आहुति मंत्र इस प्रकार पढ़ा जाता है: 'ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् स्वाहा।'




