विस्तृत उत्तर
नान्दीमुख श्राद्ध में स्वधा के स्थान पर स्वाहा या सम्पन्नम् शब्द का प्रयोग इसलिए किया जाता है क्योंकि इस अवस्था में पितरों को प्रसन्न, संतुष्ट और देवतुल्य माना जाता है। प्रयोग पारिजात और धर्मसिन्धु के अनुसार नान्दीमुख श्राद्ध में स्वधा के स्थान पर स्वाहा या सम्पन्नम् शब्द प्रयोग होता है, जो सामान्यतः देवकार्यों में प्रयुक्त होता है। इस कर्म में यज्ञोपवीत को अपसव्य करने के बजाय सव्य रखा जाता है, जिससे यह दर्शाया जाता है कि अब पितर पूर्णतः देवतुल्य भाव से पूजित हो रहे हैं।
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