विस्तृत उत्तर
जप में देव ध्यान की विधि भागवत पुराण और भगवद् गीता में मिलती है:
भगवद् गीता (9.34)
मन्मना भव मद्भक्तो मद्याजी मां नमस्कुरु।' — मन मुझमें लगाओ, मेरे भक्त बनो।
देव ध्यान की विधि — क्रमशः
1रूप ध्यान (स्थूल)
इष्ट देव की मूर्ति या चित्र सामने रखें। आँखें बंद करके वह रूप मन में देखें:
उदाहरण — शिव ध्यान
ध्यायेत् सदा सवितृमण्डलमध्यवर्तिनारायणं ससितकिरणमानन्दरूपम्।
देवता अनुसार ध्यान
- ▸शिव: श्वेत वर्ण, जटाधारी, त्रिनेत्र, गंगा, चंद्र
- ▸विष्णु: पीत वस्त्र, शंख-चक्र-गदा-पद्म, चतुर्भुज
- ▸दुर्गा: सिंहवाहिनी, दस भुजाएं, त्रिशूल
- ▸गणेश: हाथी मुख, एकदंत, मोदक
2गुण ध्यान (सूक्ष्म)
रूप से आगे — देव के गुणों का ध्यान:
- ▸शिव = चेतना, मोक्ष, कल्याण
- ▸विष्णु = पालन, करुणा, क्षमा
- ▸दुर्गा = शक्ति, रक्षा, माँ का प्रेम
3नाद ध्यान
मंत्र की ध्वनि को भीतर से सुनें — मन माला पर नहीं, ध्वनि पर।
सर्लतम विधि
जप करते समय बस यह भाव रखें — 'मैं भगवान के सामने हूँ, वे मुझे सुन रहे हैं।'





