विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में इस विषय का हृदयस्पर्शी और भयावह वर्णन मिलता है। जब पापी जीव के सामने यमदूत प्रकट होते हैं, तो उसकी जो दशा होती है, उसे भगवान विष्णु ने गरुड़ को इस प्रकार बताया है:
यमदूतों को देखकर पापी जीव अत्यंत भयभीत हो जाता है। उसका हृदय भय से काँप उठता है। गरुड़ पुराण के प्रथम अध्याय में स्पष्ट कहा गया है — 'उन्हें देखकर भयभीत हृदय वाला वह मरणासन्न प्राणी मल-मूत्र का विसर्जन करने लगता है।' भय इतना अत्यधिक होता है कि शरीर का नियंत्रण पूरी तरह समाप्त हो जाता है।
वह जीव 'हाय-हाय' करते हुए, विलाप करते हुए शरीर से निकलता है। वह बोलना चाहता है — अपने परिजनों को पुकारना चाहता है — परंतु मृत्यु के समय वाणी पहले ही जा चुकी होती है। यमदूतों की तर्जनाओं (डराने-धमकाने) से उसका हृदय विदीर्ण हो जाता है।
पुण्यात्माओं की स्थिति इसके विपरीत होती है — उनके लिए आने वाले देवदूत सौम्य और दिव्य स्वरूप के होते हैं और उन्हें देखकर पुण्यात्मा को शांति और हर्ष का अनुभव होता है।





