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मंत्र जप विधि📜 पूजा पद्धति, शैव/वैष्णव परंपरा1 मिनट पठन

मंत्र जप के बाद भगवान से क्षमा प्रार्थना कैसे करें?

संक्षिप्त उत्तर

'मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं... परिपूर्णं तदस्तु मे।' शिव: 'कर चरणकृतं... क्षमस्व शिव शम्भो।' सरल: 'गलती हुई — क्षमा, स्वीकार करें।' प्रत्येक जप अंत = अनिवार्य।

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विस्तृत उत्तर

जप बाद क्षमा प्रार्थना:

सर्वदेवता श्लोक

मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर। यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥

— 'मंत्र/क्रिया/भक्ति में कमी हो — हे देव, मेरी पूजा पूर्ण हो।'

शिव विशेष

कर चरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा। श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम्। विहितमविहितं वा सर्वमेतत् क्षमस्व। शिव शिव करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो॥

सरल: 'हे [देवता], मेरी अज्ञानता से जो भी गलती हुई हो — क्षमा करें। मेरा जप/पूजा स्वीकार करें। ॐ शांतिः।'

कब: प्रत्येक जप/पूजा के अंत में — अनिवार्य अभ्यास।

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शास्त्रीय स्रोत
पूजा पद्धति, शैव/वैष्णव परंपरा
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