विस्तृत उत्तर
जप बाद क्षमा प्रार्थना:
सर्वदेवता श्लोक
मंत्रहीनं क्रियाहीनं भक्तिहीनं सुरेश्वर। यत्पूजितं मया देव परिपूर्णं तदस्तु मे॥
— 'मंत्र/क्रिया/भक्ति में कमी हो — हे देव, मेरी पूजा पूर्ण हो।'
शिव विशेष
कर चरणकृतं वाक्कायजं कर्मजं वा। श्रवणनयनजं वा मानसं वापराधम्। विहितमविहितं वा सर्वमेतत् क्षमस्व। शिव शिव करुणाब्धे श्रीमहादेव शम्भो॥
सरल: 'हे [देवता], मेरी अज्ञानता से जो भी गलती हुई हो — क्षमा करें। मेरा जप/पूजा स्वीकार करें। ॐ शांतिः।'
कब: प्रत्येक जप/पूजा के अंत में — अनिवार्य अभ्यास।





