विस्तृत उत्तर
सर्प सूक्त के तीन श्लोकों का सरल हिंदी अर्थ इस प्रकार है:
प्रथम श्लोक: 'उन सभी सर्पों को नमस्कार है जो पृथ्वी पर (बिल आदि में) रहते हैं। जो अंतरिक्ष में (वायुमंडल में) और जो दिवि (स्वर्गलोक में) देवता रूप में स्थित हैं, उन सभी सर्पों को नमस्कार है।'
द्वितीय श्लोक: 'जो सर्प आकाश के प्रकाशमान लोकों में या सूर्य की किरणों में वास करते हैं, और जिन्होंने जलों में अपना निवास बनाया है, उन सभी सर्पों को नमस्कार है।'
तृतीय श्लोक: 'जो सर्प दुष्ट राक्षसों के बाणों के रूप में चलते हैं, जो वृक्षों पर या वनस्पतियों में लिपटे रहते हैं, अथवा जो वटों (बिल या गहरे गड्ढों) में शयन करते हैं, उन सभी सर्पों को हमारा नमस्कार है।'





