पूर्णाहुति और समापनहवन के बाद शांति पाठ क्यों करते हैं?
शांति पाठ: यज्ञ कुंड की ऊष्मा शांत करने और ब्रह्मांड में शांति की कामना के लिए। मंत्र: 'ॐ द्यौः शान्तिरन्तरिक्षं शान्तिः...' — आकाश, अंतरिक्ष, पृथ्वी, जल, वनस्पति, देव, ब्रह्म सभी में शांति। बाद में पुष्प/आम्र पल्लव से पूरे घर में जल छिड़कें।
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