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देवी सूक्तम् पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 2 प्रश्न उपलब्ध हैं।

मंत्र विज्ञान

देवी सूक्तम् का क्या महत्व है?

देवी सूक्तम् = ऋग्वेद (10.125), वाक् आम्भृणी द्वारा रचित। दुर्गा सप्तशती के पाठ के आरंभ/अंत में पढ़ा जाता है। देवी के प्रति पूर्ण समर्पण का प्रतीक। फल: मानसिक तनाव दूर, नकारात्मक ऊर्जा नाश, आध्यात्मिक उन्नति।

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वैदिक साहित्य में माँ दुर्गा

ऋग्वेद के 'देवी सूक्तम्' में क्या कहा गया है?

ऋग्वेद (10.125) — 'देवी सूक्तम्' या 'वाक् आम्भृणी सूक्त': महर्षि अम्भृण की पुत्री वाक् ऋषिका ने आत्म-साक्षात्कार में घोषणा की: 'मैं ही ब्रह्मांड की शासिका, वसु-रुद्र-आदित्यों को धारण करने वाली हूँ।' ब्रह्मांड की मूल ऊर्जा चेतनामय स्त्री-तत्त्व है।

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