विस्तृत उत्तर
देवी के हाथों में दो प्रमुख मुद्राएँ हैं:
अभय मुद्रा: यह भक्तों को दरिद्रता, भय और जीवन के संकटों से अभय (सुरक्षा) प्रदान करता है।
वरद मुद्रा: यह देवी की असीम उदारता और सभी सत्कामनाओं की पूर्ति का परिचायक है।
यह मुद्राएँ यह स्थापित करती हैं कि जिस समाज या व्यक्ति के पास श्री (लक्ष्मी) है, उसका प्रथम कर्तव्य समाज को भयमुक्त करना और दान (वरद) के माध्यम से दूसरों का पोषण करना है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





