का सरल उत्तर
अभय मुद्रा = भक्तों को दरिद्रता, भय और जीवन के संकटों से सुरक्षा। वरद मुद्रा = असीम उदारता और सत्कामनाओं की पूर्ति। जिनके पास श्री है उनका कर्तव्य समाज को भयमुक्त करना और दान देना है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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