श्रीसूक्त में माँ लक्ष्मी का स्वरूपमाँ लक्ष्मी के चार हाथों का क्या अर्थ है?चार हाथ = पुरुषार्थ चतुष्टय (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष)। दो हाथों में कमल = आध्यात्मिक पूर्णता। एक हाथ अभय मुद्रा = भय-दरिद्रता से सुरक्षा। एक हाथ वरद मुद्रा = असीम उदारता और सत्कामनाओं की पूर्ति।#चार हाथ#पुरुषार्थ चतुष्टय#धर्म अर्थ काम मोक्ष
असितांग भैरव परिचय और स्वरूपअसितांग भैरव के कौन से आयुध हैं?असितांग भैरव के चार हाथों में शूल (त्रिशूल), कपाल (खोपड़ी), पाश (फंदा) और डमरू — ये चार तांत्रिक आयुध हैं जिनसे वे लोकों की रक्षा करते हैं।
विष्णु अस्त्र शस्त्रविष्णु जी के चार हाथों में क्या-क्या होता है?विष्णु के चार हाथों में — पांचजन्य शंख (पंचभूत प्रतीक), सुदर्शन चक्र (मन/न्याय प्रतीक), कौमोदकी गदा (ज्ञान-शक्ति प्रतीक) और कमल पद्म (सृष्टि-सौंदर्य प्रतीक) होते हैं।#विष्णु चतुर्भुज#चार हाथ#शंख चक्र गदा पद्म
देव ज्ञानविष्णु के चार हाथ — शंख चक्र गदा पद्म अर्थ?शंख=ॐ/धर्म आह्वान। चक्र=काल/अधर्म नाश। गदा=बल/दंड। पद्म=सृष्टि/शुद्धता(कीचड़ में कमल)। 4 हाथ=4 पुरुषार्थ: धर्म/अर्थ/काम/मोक्ष। विष्णु=सम्पूर्ण पालक।#विष्णु#चार हाथ#शंख