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चार हाथ से जुड़े सभी प्रश्न(5)

चार हाथ पर शास्त्रीय व्याख्या, विधि, नियम, मंत्र और लाभ — सब एक ही स्थान पर। कुल 5 प्रश्न उपलब्ध हैं।

महेश्वरी धेनु

महेश्वरी गाय का स्वरूप कैसा बताया गया है?

महेश्वरी गाय चार पैरों, चार मुखों, चार हाथों, चार स्तनों, चार नेत्रों, चार सींगों, चार दाढ़ों और बत्तीस गुणों से युक्त बताई गई है।

#महेश्वरी गाय#विश्वरूपा#चार पैर
श्रीसूक्त में माँ लक्ष्मी का स्वरूप

माँ लक्ष्मी के चार हाथों का क्या अर्थ है?

चार हाथ = पुरुषार्थ चतुष्टय (धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष)। दो हाथों में कमल = आध्यात्मिक पूर्णता। एक हाथ अभय मुद्रा = भय-दरिद्रता से सुरक्षा। एक हाथ वरद मुद्रा = असीम उदारता और सत्कामनाओं की पूर्ति।

#चार हाथ#पुरुषार्थ चतुष्टय#धर्म अर्थ काम मोक्ष
असितांग भैरव परिचय और स्वरूप

असितांग भैरव के कौन से आयुध हैं?

असितांग भैरव के चार हाथों में शूल (त्रिशूल), कपाल (खोपड़ी), पाश (फंदा) और डमरू — ये चार तांत्रिक आयुध हैं जिनसे वे लोकों की रक्षा करते हैं।

#असितांग भैरव आयुध#शूल कपाल पाश डमरू#चार हाथ
विष्णु अस्त्र शस्त्र

विष्णु जी के चार हाथों में क्या-क्या होता है?

विष्णु के चार हाथों में — पांचजन्य शंख (पंचभूत प्रतीक), सुदर्शन चक्र (मन/न्याय प्रतीक), कौमोदकी गदा (ज्ञान-शक्ति प्रतीक) और कमल पद्म (सृष्टि-सौंदर्य प्रतीक) होते हैं।

#विष्णु चतुर्भुज#चार हाथ#शंख चक्र गदा पद्म
देव ज्ञान

विष्णु के चार हाथ — शंख चक्र गदा पद्म अर्थ?

शंख=ॐ/धर्म आह्वान। चक्र=काल/अधर्म नाश। गदा=बल/दंड। पद्म=सृष्टि/शुद्धता(कीचड़ में कमल)। 4 हाथ=4 पुरुषार्थ: धर्म/अर्थ/काम/मोक्ष। विष्णु=सम्पूर्ण पालक।

#विष्णु#चार हाथ#शंख
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