विस्तृत उत्तर
सत्यलोक का स्वरूप पूर्णतया अकल्पनीय और मानवी बुद्धि से परे है। सामान्य भौतिक लोकों की भाँति यह मिट्टी, जल या पाषाण का पिण्ड नहीं है अपितु यह विशुद्ध सत्व और ब्रह्माण्डीय ऊर्जा से निर्मित है। सत्यलोक को पुराणों और उपनिषदों में ब्रह्मपुर भी कहा गया है। यहाँ सर्वत्र अलौकिक और विशालकाय कमल के पुष्प खिले रहते हैं जिनसे निरन्तर दिव्य ऊर्जा का प्रवाह होता रहता है। छांदोग्य उपनिषद (८.१) के आधार पर वैदिक दर्शन स्पष्ट करता है कि ब्रह्मपुर के ठीक केन्द्र में एक महान और भव्य राजमहल है जहाँ स्वयं भगवान ब्रह्मा अपनी अर्धांगिनी माता सरस्वती के साथ निवास करते हैं। यहाँ सर्वत्र अलौकिक प्रकाश है और किसी भी प्रकार का अंधकार, छाया या रात्रि का अस्तित्व नहीं है।
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