विस्तृत उत्तर
हिंदू शास्त्रों और भक्त-परंपरा के अनुसार जब भगवान शिव किसी पर प्रसन्न होते हैं तो अनेक प्रकार के संकेत मिलते हैं। ये संकेत बाहरी और आंतरिक दोनों प्रकार के होते हैं।
आंतरिक संकेत — ध्यान में या नींद में अनायास डमरू की ध्वनि सुनाई दे, त्रिशूल दिखे, या भगवान शिव के दर्शन हों — ये कृपा के स्पष्ट संकेत माने जाते हैं। मन में अकारण शांति और एक गहरे ठहराव का अनुभव होना शिव-कृपा का संकेत है।
बाहरी संकेत — जहाँ कहीं भी आप जाएँ और अनपेक्षित स्थान पर त्रिशूल या शिवलिंग दिखे, शिव के प्रतीक अकारण जीवन में आने लगें — यह कृपा का संदेश है। जीवन में बाधाएँ स्वाभाविक रूप से दूर होती दिखें, बिगड़े हुए कार्य बनने लगें, तो समझें शिव का हाथ है।
भक्ति में परिवर्तन — जब मन बिना जबरदस्ती के शिव-भजन और 'ॐ नमः शिवाय' में स्वतः लगने लगे, शिव के विषय में अधिक से अधिक जानने की जिज्ञासा बढ़े, सत्संग की ओर मन खिंचे — ये सब कृपा के सूक्ष्म संकेत हैं।
शास्त्रीय संदेश — शिव पुराण में कहा गया है कि शिव की कृपा से भक्त का जीवन धीरे-धीरे अधिक सात्विक, शांत और उद्देश्यपूर्ण बनने लगता है। भोलेनाथ की कृपा शोर नहीं मचाती, वह चुपचाप जीवन को बदल देती है।





