का सरल उत्तर
महर्षि मृकंडु ने अल्पायु किंतु गुणवान पुत्र मार्कण्डेय को चुना। १६ वर्ष की अल्पायु जानकर मार्कण्डेय ने शिवलिंग के समक्ष इस मंत्र का जप किया — जप ऊर्जा और शिव कृपा ने यमराज को पराजित किया और मार्कण्डेय चिरंजीवी हुए।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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