रुद्राष्टाध्यायी के अध्यायशिवसंकल्प सूक्त क्या है?शिवसंकल्प सूक्त = रुद्राष्टाध्यायी का प्रथम अध्याय। देवता: मन और गणेश। 'गणानां त्वा गणपति...' से आरंभ। मुख्य मंत्र: 'तन्मे मनः शिवसंकल्पमस्तु' (मेरा मन शुभ संकल्पों वाला हो)। जाग्रत और सुषुप्त में मन नियंत्रित करता है।#शिवसंकल्प सूक्त#प्रथम अध्याय#गणेश
शिव का बाह्य स्वरूप और प्रतीकशिव की जटाओं का क्या प्रतीकात्मक अर्थ है?शिव की जटाएँ = अनंत अंतरिक्ष और वायुमंडल का प्रतीक। जटाओं में गंगा का धारण = अनियंत्रित संवेगों और ऊर्जा को केवल गहरे ध्यान और मन के नियंत्रण से साधा जा सकता है।
ध्यान साधनाध्यान के दौरान मन को कैसे नियंत्रित करें?गीता (6/35) — 'अभ्यास और वैराग्य से मन वश में होता है।' ध्यान में मन को लड़कर नहीं — एक लंगर (ओम्/श्वास/इष्टदेव) से पकड़ें। मन भटके तो बिना खीझे वापस लाएं (गीता 6/26)। योगसूत्र (1/14) — दीर्घकाल, निरंतर और श्रद्धापूर्वक अभ्यास से मन दृढ़ होता है।#ध्यान#मन नियंत्रण#अभ्यास