विस्तृत उत्तर
सुतल लोक भगवान के विराट स्वरूप के घुटनों में स्थित बताया गया है। श्रीमद्भागवत पुराण के द्वितीय स्कन्ध में ब्रह्मांडीय विराट पुरुष के शरीर की अलौकिक संरचना का वर्णन करते हुए सभी लोकों की स्थिति स्पष्ट की गई है। शुकदेव गोस्वामी बताते हैं कि विराट पुरुष की कटि में अतल लोक, ऊरु अर्थात जांघों में वितल लोक, और जानु अर्थात घुटनों में सुतल लोक स्थित है। इस प्रकार सुतल लोक भगवान के विराट स्वरूप के घुटनों का प्रतिनिधित्व करता है, जो इस लोक की ब्रह्मांडीय दृढ़ता, आधारभूत महत्ता और भगवान के स्वरूप के साथ इसके अभिन्न संबंध को इंगित करता है।
आगे क्या पढ़ें
प्रश्न से जुड़े हब और आज के उपयोगी पंचांग लिंक





