विस्तृत उत्तर
श्रीमद्भागवत महापुराण के द्वितीय स्कन्ध के पंचम अध्याय में ब्रह्मांड की विशाल संरचना को भगवान के विराट स्वरूप, अर्थात विराट पुरुष, के अंगों के रूप में प्रस्तुत किया गया है। भागवत पुराण के अनुसार बड़े-बड़े दार्शनिक और महर्षि मानते हैं कि ब्रह्मांड में जितने भी लोक हैं, वे सभी परमेश्वर के विराट शरीर के विभिन्न ऊपरी और निचले अंगों का प्रदर्शन हैं। इसी वर्णन में ऊर्ध्व लोकों की स्थिति बताते हुए कहा गया है कि विराट पुरुष के वक्षस्थल के ऊपरी भाग से लेकर ग्रीवा तक के स्थान में जनलोक और तपोलोक स्थित हैं, जबकि सबसे शीर्ष पर सत्यलोक, यानी ब्रह्मा का धाम, उनके मस्तक पर सुशोभित है। भागवत पुराण तपोलोक को जनलोक से आठ करोड़ योजन ऊपर भी बताता है।
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