विस्तृत उत्तर
भगवान विष्णु और देवी लक्ष्मी का संबंध लौकिक दृष्टि से केवल पति-पत्नी का प्रतीत हो सकता है, अपितु तात्विक और आध्यात्मिक दृष्टि से यह प्रकृति और पुरुष का शाश्वत, अद्वैत और अविभाज्य संबंध है।
जनमानस में यह सामान्य धारणा व्याप्त है कि लक्ष्मी जी केवल धन की देवी हैं और वे समुद्र मंथन से प्रकट हुईं, किंतु पुराण इस भ्रांति को दूर करते हुए स्पष्ट करता है कि लक्ष्मी जी नित्य (शाश्वत) हैं और विष्णु जी की भाँति ही सर्वव्यापी हैं। समुद्र मंथन से उनका प्रकटीकरण केवल एक लीला मात्र था।
निष्कर्षतः, इस ब्रह्मांड में पुरुषवाची समस्त जगत भगवान हरि (विष्णु) का स्वरूप है और स्त्रीवाची समस्त जगत माता लक्ष्मी का स्वरूप है। असली लक्ष्मी केवल भौतिक धन नहीं है, बल्कि वह ऊर्जा, विचार और कर्म में छुपी हुई वह शक्ति है जो जीवन का संचालन करती है।





