विस्तृत उत्तर
सनातन धर्म क्या है?
शब्द-अर्थ
सनातन' = संस्कृत में शाश्वत/अनादि/सदा रहने वाला। 'धर्म' = धारण करना/कर्तव्य/जीवन-नियम। अतः सनातन धर्म = वह शाश्वत जीवन-पद्धति जिसका न आदि है, न अंत।
स्वरूप
सनातन धर्म केवल एक पूजा-पद्धति नहीं — यह एक संपूर्ण जीवन-दर्शन, आत्मिक विज्ञान और जीवन-पद्धति है। इसके प्रवर्तक कोई एक व्यक्ति नहीं — यह सृष्टि के साथ उत्पन्न शाश्वत सत्य है।
मूल ग्रंथ
- ▸श्रुति: चार वेद और उपनिषद
- ▸स्मृति: स्मृतियाँ, पुराण, इतिहास (रामायण, महाभारत)
- ▸भगवद्गीता (प्रस्थानत्रयी)
मूल सिद्धांत
- 1एकेश्वरवाद: ब्रह्म एक है — अनेक देवता उसी की अभिव्यक्तियाँ हैं।
- 2कर्म-सिद्धांत: हर कर्म का फल अवश्य मिलता है।
- 3पुनर्जन्म: आत्मा कर्म के अनुसार पुनः जन्म लेती है।
- 4मोक्ष: जन्म-मृत्यु के चक्र से मुक्ति — परम लक्ष्य।
- 5पुरुषार्थ चतुष्टय: धर्म, अर्थ, काम, मोक्ष — चार जीवन-लक्ष्य।
- 6वर्णाश्रम: समाज और जीवन-अवस्थाओं की व्यवस्था।
विशेषता
सनातन धर्म विविधता में एकता का धर्म है — *'एकं सत् विप्रा बहुधा वदन्ति'* (ऋग्वेद 1.164.46) — सत्य एक है, ज्ञानी उसे विभिन्न नामों से जानते हैं।
गीता में 'सनातन' शब्द
अर्जुन ने गीता 1.40 में 'कुलधर्माः सनातनाः' कहा। श्रीकृष्ण ने भी आत्मा को 'सनातन' कहा है।





