विस्तृत उत्तर
महाभारत और विभिन्न पुराणों में 'अर्धनारीश्वर' स्वरूप का अत्यंत विस्तृत वर्णन है। यह स्वरूप दर्शाता है कि ईश्वर न तो पूर्ण रूप से पुरुष है और न ही स्त्री। यह ब्रह्मांडीय संतुलन (Cosmic Balance) का सर्वोच्च प्रतीक है।
अर्धनारीश्वर यह सिद्ध करता है कि पुरुष (Right half) और प्रकृति (Left half), शिव और शक्ति एक ही परमतत्त्व के दो अविभाज्य पहलू हैं।
आधुनिक मनोविज्ञान और विज्ञान भी यह मानता है कि प्रत्येक जीव में नर और मादा दोनों के गुण (Anima and Animus) विद्यमान होते हैं, और अर्धनारीश्वर उसी आंतरिक पूर्णता का प्रतीक है।





