विस्तृत उत्तर
अर्धनारीश्वर स्वरूप समस्त अस्तित्वगत विरोधाभासों (द्वंद्वों) के समाधान को प्रस्तुत करता है। यह सिखाता है कि जीवन, मृत्यु, भोग, योग, वैराग्य, और सौंदर्य जैसे परस्पर विरोधी गुण भी परम चेतना में सह-अस्तित्व रख सकते हैं।
यह बोध साधक को अपने आंतरिक द्वैत से मुक्त करता है, और जीवन की सही लय प्राप्त करने में सहायक होता है।
साथ ही, यह सिखाता है कि साधक को संसार में सक्रिय (शक्ति की तरह) रहना चाहिए, लेकिन भीतर से वैराग्य (शिव की तरह) का नियंत्रण रखना चाहिए।





