विस्तृत उत्तर
साधक को श्री रुद्र के स्वरूप का ध्यान करना चाहिए।
ध्यान में वह रुद्र जो बैल (वृष) पर आरूढ़ हैं, जिनके शरीर का आधा भाग देवी उमा का है (अर्धनारीश्वर स्वरूप), जो शांत, शुद्ध, नित्य और सर्वव्यापी हैं — इस स्वरूप का ध्यान किया जाता है।
इस ध्यान से भक्त पूजा के लिए मानसिक रूप से तैयार होता है।
समर्पण मंत्र: ध्यान के बाद आसन दिया जाता है, जिसका मंत्र है: 'ॐ भूर् भुवः स्वाहा सः रुद्राय सगणाय सपरिवाराय श्री सांब सदाशिवाय नमः ध्यानं समर्पयामि।'





