विस्तृत उत्तर
शिव के बिना शक्ति निराधार है, और शक्ति के बिना शिव 'शव' (निष्क्रिय) के समान हैं।
तात्विक रूप में, शिव 'पुरुष' (Pure Consciousness) हैं और पार्वती 'प्रकृति' (Creative Force)। पुरुष 'अकर्ता' (non-doer) और 'निर्गुण' है, जो केवल एक साक्षी भाव में रहता है, जबकि प्रकृति चलायमान है, जो ब्रह्मांड को आकार और गति प्रदान करती है।
जिस प्रकार जल और उसका स्वाद (रस) एक-दूसरे से अलग नहीं हो सकते, उसी प्रकार शिव और शक्ति अभिन्न हैं।
शास्त्रों के अनुसार, भगवान शिव और माता पार्वती का संयुक्त स्वरूप ही समस्त सृष्टि का मूल आधार है। सनातन दर्शन इस बात की पुष्टि करता है कि संपूर्ण विशाल विश्व की सृष्टि इन्हीं दोनों के आधार पर टिकी हुई है।





