विस्तृत उत्तर
महर्षि पराशर अत्यंत विस्तार से समझाते हैं कि भगवान विष्णु पुरुष तत्त्व (विशुद्ध चेतना) हैं और लक्ष्मी स्त्री तत्त्व (क्रियाशील ऊर्जा) हैं।
दोनों के मध्य का संबंध अग्नि और उसकी उष्णता के समान है; जिस प्रकार अग्नि से उसकी गर्मी को अलग नहीं किया जा सकता, उसी प्रकार विष्णु से लक्ष्मी को पृथक नहीं किया जा सकता।
इस सर्वांगीण विश्लेषण का निष्कर्ष यह है कि जहाँ-जहाँ विष्णु (धर्म, पालन, न्याय और स्थिरता) हैं, वहाँ-वहाँ लक्ष्मी (श्री, ऐश्वर्य, सफलता और नीति) स्वतः निवास करती हैं।





