विस्तृत उत्तर
महर्षि पराशर ने लक्ष्मी और नारायण के संबंध को कई रूपकों के माध्यम से स्पष्ट किया है:
अर्थ (Meaning/Substance) और वाणी (Speech/Expression): विचारों की सत्ता विष्णु है, परंतु उनकी अभिव्यक्ति और संसार तक उनका संचार लक्ष्मी के माध्यम से होता है। बिना अभिव्यक्ति के विचार अपूर्ण है।
नय (नियम/Justice) और नीति (Policy/Execution): विष्णु धर्म का विधान हैं, जबकि लक्ष्मी उस विधान को संसार में लागू करने वाली कार्यप्रणाली (नीति) हैं।
बोध (ज्ञान/Consciousness) और बुद्धि (Intellect): ज्ञान का अमूर्त आधार विष्णु हैं, परंतु उस ज्ञान को ग्रहण करने और समझने की जो व्यावहारिक क्षमता (बुद्धि) है, वह लक्ष्मी है।
स्रष्टा (Creator) और सृष्टि (Creation): निर्माता विष्णु हैं और उनकी जो रचना प्रकट होती है, वह स्वयं लक्ष्मी हैं।
धर्म (Righteousness) और सत्क्रिया (Good Actions): धर्म का सिद्धांत विष्णु है, और उस सिद्धांत का दैनिक जीवन में व्यावहारिक आचरण (सत्क्रिया) लक्ष्मी है।
यज्ञ (Sacrifice) और दक्षिणा (Offering/Reward): प्रत्येक शुभ कर्म (यज्ञ) विष्णु है, और उस कर्म की पूर्णता पर प्राप्त होने वाला प्रतिफल या सफलता (दक्षिणा) लक्ष्मी है।





