विस्तृत उत्तर
विष्णु पुराण में शब्द और अर्थ के संबंध के माध्यम से विष्णु और लक्ष्मी की अद्वैतता को समझाया गया है। जिस प्रकार शब्द और उसका अर्थ अलग नहीं किए जा सकते, वैसे ही विष्णु और लक्ष्मी अविभाज्य हैं।
पुराण स्पष्ट करता है कि:
— यदि विष्णु 'अर्थ' (Meaning) हैं, तो लक्ष्मी 'वाणी' (Speech) हैं।
— यदि विष्णु 'धर्म' हैं, तो लक्ष्मी 'सत्क्रिया' (शुभ कर्म) हैं।
— यदि विष्णु 'सृष्टा' (रचयिता) हैं, तो लक्ष्मी यह सम्पूर्ण 'सृष्टि' (रचना) हैं।
— यदि विष्णु 'संतोष' हैं, तो लक्ष्मी 'नित्य तृप्ति' हैं।
— यदि विष्णु 'वायु' हैं, तो लक्ष्मी उसकी 'गति' हैं।
— यदि विष्णु 'समुद्र' हैं तो लक्ष्मी उसकी उठने वाली 'तरंग' हैं।





