विष्णु पुराण में लक्ष्मी-विष्णु की अद्वैतता कैसे समझाई गई है?
की चेकलिस्ट
विष्णु पुराण: विष्णु = अर्थ → लक्ष्मी = वाणी; विष्णु = धर्म → लक्ष्मी = सत्क्रिया; विष्णु = सृष्टा → लक्ष्मी = सृष्टि; विष्णु = संतोष → लक्ष्मी = नित्य तृप्ति; विष्णु = वायु → लक्ष्मी = गति; विष्णु = समुद्र → लक्ष्मी = तरंग।
- 1यदि विष्णु 'अर्थ' (Meaning) हैं, तो लक्ष्मी 'वाणी' (Speech) हैं।
- 2यदि विष्णु 'धर्म' हैं, तो लक्ष्मी 'सत्क्रिया' (शुभ कर्म) हैं।
- 3यदि विष्णु 'सृष्टा' (रचयिता) हैं, तो लक्ष्मी यह सम्पूर्ण 'सृष्टि' (रचना) हैं।
- 4यदि विष्णु 'संतोष' हैं, तो लक्ष्मी 'नित्य तृप्ति' हैं।
- 5यदि विष्णु 'वायु' हैं, तो लक्ष्मी उसकी 'गति' हैं।
- 6यदि विष्णु 'समुद्र' हैं तो लक्ष्मी उसकी उठने वाली 'तरंग' हैं।
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लक्ष्मी-नारायण तत्त्व
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