विस्तृत उत्तर
सत्यलोक संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है — सत्य और लोक। सत्य का अर्थ है परम सत्य, ज्ञान, अस्तित्व जो कभी मिथ्या न हो और लोक का अर्थ है स्थान या जगत। इस प्रकार सत्यलोक का शाब्दिक अर्थ है परम सत्य का लोक या वह स्थान जहाँ केवल सत्य ही सत्य है, असत्य का कोई स्थान नहीं। यह लोक पूर्ण रूप से विशुद्ध सत्वगुण से निर्मित है जहाँ रजोगुण और तमोगुण का लेशमात्र भी प्रवेश नहीं है। सत्यलोक को ब्रह्मलोक भी कहते हैं क्योंकि यह भगवान ब्रह्मा का निवास है। ब्रह्माण्ड पुराण इसे सातवाँ और अन्तिम लोक बताता है जो अनन्त और कान्तिमय है। यहाँ द्वैत भाव का पूर्णतः अभाव है और जीव परम सत्य के साथ अपने एकीकरण के लिए प्रस्तुत होता है।
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