विस्तृत उत्तर
अतल शब्द संस्कृत के दो शब्दों से मिलकर बना है — अ (नहीं) और तल (आधार या तल)। इस प्रकार अतल का शाब्दिक अर्थ है ऐसा स्थान जहाँ का कोई वास्तविक या ठोस आधार नहीं हो। शास्त्रीय दृष्टिकोण से इसका तात्विक अर्थ यह है कि यह ऐसा स्थान है जहाँ आत्मा का कोई वास्तविक या ठोस आध्यात्मिक आधार नहीं होता। हाटक रस पीकर ईश्वरोऽहं सिद्धोऽहम ऐसा मान लेना जीव की इसी चरम अज्ञानता का प्रत्यक्ष प्रमाण है। इस लोक में सब कुछ है — संपदा, सुख, विलासिता — परंतु आत्मज्ञान और आध्यात्मिक आधार का पूर्णतः अभाव है। इसीलिए इसे अतल (बिना तल का) कहा गया है।
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