विस्तृत उत्तर
शालिग्राम भगवान विष्णु का पवित्र पाषाण स्वरूप माना जाता है। यह सामान्यतः गंडकी नदी से प्राप्त काले, गोल या अंडाकार, चक्र-चिह्नित पत्थर होते हैं। पुराणिक कथा के अनुसार वृंदा के श्राप के बाद भगवान विष्णु ने शालिग्राम रूप में निवास करने का वचन दिया। शालिग्राम को मूर्ति की तरह प्राण-प्रतिष्ठा की आवश्यकता नहीं मानी जाती, क्योंकि वह स्वयं सिद्ध और दिव्य माना जाता है। वैष्णव घरों और मंदिरों में शालिग्राम की पूजा तुलसी दल, जल, चंदन और मंत्रों से की जाती है। यह विष्णु की उपस्थिति, संरक्षण और भक्त-प्रेम का प्रतीक है।
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