का सरल उत्तर
वृंदा ने श्राप दिया: 'तुम पाषाण (शालिग्राम) में परिवर्तित हो जाओ और अपनी पत्नी के वियोग का दुःख सहो।' भगवान विष्णु ने उसके पातिव्रत्य और अनन्य भक्ति का सम्मान करते हुए श्राप सहर्ष स्वीकार किया।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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