विस्तृत उत्तर
वज्रकीट पुराणिक वर्णन में वह विशेष कीट माना जाता है जो शालिग्राम शिलाओं पर चक्र के चिह्न बनाता है। भगवान विष्णु ने वृंदा को वरदान देते हुए कहा कि गंडकी नदी के क्षेत्र में वे पाषाण रूप धारण करेंगे और वज्रकीट अपने वज्र जैसे कठोर दाँतों से उन शिलाओं को काटकर उनमें चक्र चिह्न उकेरेगा। वैष्णव परंपरा में शालिग्राम शिला पर बने प्राकृतिक चक्र-चिह्न को भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र का प्रतीक माना जाता है। इसलिए वज्रकीट की कथा शालिग्राम की दिव्यता और उसकी पहचान से जुड़ी हुई है।
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