विस्तृत उत्तर
जालंधर और वृंदा की कथा शिव की क्रोधाग्नि से जालंधर के जन्म से शुरू होती है। समुद्र ने उसे पुत्र की तरह पाला और वह दैत्यों का पराक्रमी राजा बना। उसका विवाह वृंदा से हुआ, जो विष्णु भक्त और महान पतिव्रता थी। वृंदा के सतीत्व से जालंधर अजेय बन गया। उसने देवताओं को हराया और पार्वती पर भी दृष्टि डालने की धृष्टता की। पार्वती के संकेत पर विष्णु ने जालंधर का रूप लेकर वृंदा का पतिव्रत कवच तोड़ा। तब शिव ने जालंधर का वध किया। वृंदा ने विष्णु को पाषाण और पत्नी-वियोग का श्राप दिया, अग्नि-समाधि ली और तुलसी रूप में प्रकट हुई। विष्णु शालिग्राम रूप में उसके साथ पूजे गए।
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