विस्तृत उत्तर
वृंदा ने भगवान विष्णु को अत्यंत कठोर श्राप दिया। जब उसे पता चला कि जिसे वह अपना पति समझ रही थी वह वास्तव में विष्णु थे, तो उसका हृदय टूट गया। उसने कहा कि विष्णु ने पत्थर की तरह कठोर हृदय होकर उसके सतीत्व से छल किया है, इसलिए वे पाषाण रूप धारण करेंगे। यही श्राप आगे शालिग्राम शिला के रूप में माना गया। वृंदा ने यह भी कहा कि जिन मायावी राक्षसों और वानरों से यह छल रचा गया, भविष्य में विष्णु को मानव अवतार में पत्नी-वियोग झेलना पड़ेगा और पत्नी की खोज में वानरों की सहायता लेनी पड़ेगी। इसे रामावतार से जोड़ा जाता है।
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