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विस्तृत उत्तर
दशगात्र में दिए जाने वाले पिण्ड का तृतीय भाग यमराज के अनुचरों, यानी यमदूतों, को दिया जाता है। इससे वे संतुष्ट रहते हैं और प्रेत को अकारण कष्ट नहीं देते। मृत्यु के बाद आत्मा यममार्ग की यात्रा के लिए यमदूतों के अधीन होती है, इसलिए पिण्डदान का यह भाग आत्मा की यात्रा में अनावश्यक पीड़ा को कम करने से जुड़ा है।
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