विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में धर्मराज के आदेश को लागू करने की व्यवस्था का स्पष्ट वर्णन है।
यमदूत — धर्मराज के आदेश को मुख्यतः यमदूत लागू करते हैं। ये यमलोक के कर्मचारी हैं जो यमराज की आज्ञा से चलते हैं। मृत्यु के समय जीव को लाना, यममार्ग पर ले जाना, नरक में पहुँचाना और नरक में यातनाएँ देना — ये सब यमदूतों का कार्य है।
नरक के यमदूत — नरक में अलग-अलग प्रकार के यमदूत हैं जो विभिन्न नरकों में दंड देने का कार्य करते हैं। गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'इन नरकों में एक नहीं बल्कि कई यमदूत हैं जो नरक भोगने वालों को यातनाएँ देने के लिए होते हैं।'
द्वारपाल — यमलोक के प्रवेश द्वार पर 'धर्मध्वज' नामक द्वारपाल हैं जो यमराज की आज्ञा के अनुसार जीवों को उचित द्वार से प्रवेश देते हैं।
चित्रगुप्त — वे आदेश लागू नहीं करते, परंतु उनके लेखे के बिना आदेश संभव नहीं। वे न्याय-प्रक्रिया के अनिवार्य अंग हैं।
इस पूरी व्यवस्था में यमराज सर्वोच्च हैं — उनका आदेश अंतिम है और उनके दूत उसे निर्विघ्न रूप से पालन करते हैं।





