विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में वस्त्रदान का उल्लेख मृत्यु के समय करने वाले दानों की सूची में विशेष रूप से है।
गरुड़ पुराण में मृत्यु से पहले करने योग्य दानों में तिल, स्वर्ण, नमक, सप्तधान्य, जलपात्र, लोहा, रुई, भूमि और पादुका के साथ वस्त्र का उल्लेख मिलता है। 'मान्यता है कि ये वस्तुएँ यममार्ग में मरने के बाद मनुष्य को प्राप्त होती हैं और उसकी आत्मा को कोई कष्ट नहीं मिलता।'
यमदूतों की संतुष्टि — गरुड़ पुराण के आठवें अध्याय में विभिन्न यमदूतों को विशेष दानों से संतुष्ट करने का उल्लेख है। वस्त्रदान यमदूतों की प्रसन्नता का एक साधन है।
श्राद्ध में वस्त्र — पितृपक्ष और श्राद्ध में ब्राह्मणों को वस्त्र देने से पितरों और प्रेत-आत्माओं को तृप्ति मिलती है।
प्रतीकात्मक अर्थ — वस्त्र लज्जा और गरिमा का प्रतीक है। जो जीव ने जीवन में निर्वस्त्र और असहाय लोगों को वस्त्र दिया, उसे यममार्ग पर उसी का फल मिलता है।
दान का सुखद परिणाम — वस्त्रदान करने वाला व्यक्ति यममार्ग पर अपमानित और असहाय अवस्था से बचता है।


