विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में नरक में निर्देश देने की व्यवस्था के विषय में स्पष्ट उल्लेख मिलता है।
यमराज की आज्ञा — सर्वोच्च स्तर पर यमराज निर्देश देते हैं। उनकी आज्ञा से ही नरक की समस्त प्रक्रिया चलती है। 'यमराज की आज्ञा से यमदूत लोग पापियों को नरक में ले जाते हैं' — यह वर्णन गरुड़ पुराण में मिलता है।
नरक के यमदूत — नरक में विशेष यमदूत होते हैं जो जीव को यातना देते हैं। गरुड़ पुराण में कहा गया है — 'ये नरक अनेकों प्रकार की यातनाओं से भरे हुए हैं और इनमें एक नहीं बल्कि कई यमदूत हैं।' ये यमदूत ही नरक में निर्देश देते हैं — किसे कब, कैसे यातना दी जाए।
यमदूतों द्वारा पापों की याद दिलाना — गरुड़ पुराण के तृतीय अध्याय में उल्लेख है कि यमदूत पापी से कहते हैं — 'अरे दुराचारी, तुमने जीवन में सदा सुलभ अन्न और जल का दान क्यों नहीं दिया?' यह एक प्रकार का नैतिक निर्देश है।
चित्रगुप्त — नरक में भेजने से पहले चित्रगुप्त के लेखे के आधार पर यमराज निर्देश देते हैं — किस नरक में, कितने समय के लिए।





