विस्तृत उत्तर
हाँ। गरुड़ पुराण में स्पष्ट है कि कोई भी पाप दंड-मुक्त नहीं है।
गरुड़ पुराण का सिद्धांत — 'नाभुक्तं क्षीयते कर्म कल्पकोटिशतैरपि।' अर्थात् बिना भोगे कोई भी कर्म — चाहे कितना भी छोटा हो — नष्ट नहीं होता।
श्रवण देवता — गरुड़ पुराण में 'श्रवण और श्रवणियाँ' का उल्लेख है जो 'मनुष्य के मानसिक, वाचिक और कायिक — सभी प्रकार के शुभ और अशुभ कर्मों को ठीक-ठीक जानते हैं।' यहाँ तक कि छुपाकर किए गए पाप भी रिकॉर्ड होते हैं।
मृत्यु के बाद लेखा — 'यमलोक में चित्रगुप्त के पास प्रत्येक जीव के समस्त कर्मों का लेखा होता है' — बड़े और छोटे सभी।
छोटे पापों का दंड — छोटे पापों का दंड महापापों जितना भीषण नहीं होता परंतु होता अवश्य है। यह किसी हल्के नरक में या अगले जन्म में हल्के कष्टों के रूप में मिल सकता है।
प्रायश्चित की व्यवस्था — गरुड़ पुराण में छोटे पापों के लिए दान, व्रत और ईश्वर-भक्ति से प्रायश्चित का विधान भी है।





