विस्तृत उत्तर
हाँ। गरुड़ पुराण में बड़े पापों के लिए विशेष और अत्यंत कठोर दंड का विधान है।
प्रत्येक पाप के लिए अलग नरक — गरुड़ पुराण में 'गरुड़ पुराण में कुल 36 प्रकार के नरकों का उल्लेख है, जिनमें प्रत्येक में विशेष प्रकार की सजा का प्रावधान है।' कुछ उदाहरण — गौहत्या करने वाले को रक्त से भरे गड्ढों में काँटों की यातना, ब्राह्मण-पीड़क को अंगारों में दंड।
महापापों का दंड — ब्रह्महत्यारे के लिए 'रौरव' जैसे भयंकर नरक का विधान है। 'रौरव नरक में एक बहुत बड़ा अग्निकुंड है, जहाँ पापी आत्माओं को जलाया जाता है।'
दंड की अवधि — बड़े पापों के लिए नरक-वास की अवधि भी अधिक होती है।
महापाप और भूमिदान — गरुड़ पुराण के आठवें अध्याय में कहा गया है — 'राज्यसंचालन में राजा से होने वाला महापाप न व्रतों से, न तीर्थ सेवन से और न अन्य किसी दान से नष्ट होता है, अपितु वह केवल भूमिदान से ही विलीन होता है।' यह बताता है कि बड़े पापों का दंड और उनका प्रायश्चित दोनों असाधारण होते हैं।





