विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में पापी को दंड देने वाले अनेक स्तरों पर बताए गए हैं।
यमराज — सर्वोच्च न्यायकर्ता। गरुड़ पुराण में — 'धर्मराज भी चोर की भाँति निश्चल बैठे हुए उन पापियों को देखकर उनके पापों का मार्जन करने के लिए यथोचित दंड देने की आज्ञा करते हैं।'
चित्रगुप्त — लेखाकार। वे प्रत्येक जीव के पाप-पुण्य का लेखा रखते हैं और यमराज को बताते हैं।
श्रवण और श्रवणियाँ — 'यह आमतौर पर मनुष्य जो छिपाकर करता है, उसके बारे में सब श्रवण एवं श्रवणियाँ चित्रगुप्त से बताते हैं।' ये धर्मराज के गुप्तचर हैं।
यमदूत — दंड देने वाले। 'यम के आज्ञाकारी प्रचण्ड और चण्डक आदि नाम वाले दूत एक पाश से उन्हें बाँधकर नरक की ओर ले जाते हैं।' वे नरक में विशेष प्रकार की यातनाएँ देते हैं।
कर्म स्वयं — गरुड़ पुराण का दार्शनिक सिद्धांत है कि कर्म ही अपना दंड लेकर आता है — 'जैसा बोओगे वैसा काटोगे।'




