विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में दान न करने वालों के दंड का अत्यंत स्पष्ट और भावुक वर्णन है।
यमदूत का उलाहना — गरुड़ पुराण के तृतीय अध्याय में यमदूत पापियों को मारते हुए कहते हैं — 'अरे दुराचारियों! सुलभ होने वाले भी जल और अन्न का दान कभी क्यों नहीं दिया?' यह उलाहना दान न करने का सबसे बड़ा परिणाम है।
यममार्ग पर कष्ट — गरुड़ पुराण के आठवें अध्याय में — 'दानरूपी पाथेय रहित प्राणी को यममार्ग में क्लेश प्राप्त होता है।' भूख-प्यास की असहनीय पीड़ा झेलनी पड़ती है।
वैतरणी का कष्ट — 'वैतरणी नरक में दान न करने वालों को गंदगी भरी नदी पार करवाई जाती है।' जिसने जलदान नहीं किया, उसे वैतरणी में रक्त-मवाद से प्यास बुझानी पड़ती है।
भोजन न बाँटने का दंड — 'जो लोग दूसरों के साथ भोजन साझा नहीं करते — उन्हें कीड़ों और गंदगी से भरे नरक में डाल दिया जाता है।'
पुनर्जन्म में — दान न करने वाला अगले जन्म में दरिद्रता और अभाव में जन्म लेता है।





