का सरल उत्तर
'मम किं करिष्यति वै यमः' का अर्थ है 'यमराज मेरा क्या कर सकते हैं?' — यह प्रत्येक श्लोक का अंत है जो शिव शरण में निर्भीकता की घोषणा करता है।
मूल प्रश्न का सम्पूर्ण शास्त्रीय उत्तर एक स्थान पर।
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