विस्तृत उत्तर
गरुड़ पुराण में तिलदान का उल्लेख पाप-नाश के सबसे प्रभावी साधनों में किया गया है।
तिलदान का विशेष स्थान — गरुड़ पुराण में मृत्यु के समय करने वाले दानों में 'तिल' को प्रथम स्थान दिया गया है। 'मनुष्य को अपने जीवन काल में मरने से पहले ही तिल, स्वर्ण, नमक, सप्तधान्य...' — इस सूची में तिल सबसे पहले है।
पाप-नाश की शक्ति — तिल में पाप-नाश की विशेष शक्ति मानी गई है। अंतिम समय में मृत्यु-सेज पर तिल बिखेरने का विधान है। तिल-तर्पण से पितरों और प्रेत-आत्माओं को तृप्ति मिलती है।
गरुड़ पुराण के नवें अध्याय में — 'वहाँ उस मण्डल के ऊपर तिल बिखेरकर कुशों को बिछाए' — मृत्युकाल की इस विधि में तिल का प्रयोग अनिवार्य बताया गया है।
तर्पण में तिल — जल और काले तिल से किया गया तर्पण श्राद्ध का अनिवार्य अंग है। यह प्रेत और पितरों की तृप्ति का साधन है।
यमदूतों पर प्रभाव — गरुड़ पुराण में तिलदान यमदूतों को शांत करने वाला बताया गया है।


