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विस्तृत उत्तर
मकर संक्रांति पर 'तिल-स्नान' का विशेष माहात्म्य है। आयुर्वेद, खगोल-शास्त्र और धर्मशास्त्र के अपूर्व समन्वय से शास्त्रों (जैसे गरुड़ पुराण और भविष्य पुराण) में इस दिन तिल के छह प्रकार के प्रयोग (षट्तिला) अनिवार्य बताए गए हैं।
गरुड़ पुराण' में भगवान विष्णु स्वयं गरुड़ से कहते हैं कि तिल उनके पसीने से उत्पन्न हुए हैं; ये अत्यंत पवित्र हैं और चाहे वे श्वेत हों, काले हों या भूरे हों, समस्त पापों एवं दुष्ट शक्तियों का नाश करने वाले हैं।
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